जब से अमेरिका में डौनाल्ट ट्रम्प राष्ट्रपति पद नियुक्त हुए है उनके फैसलों से वैश्विक स्तर पर कई देशो को अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है.अपने वर्तमान कार्यकाल में उन्होंने tarrif नीति को हथियार बना लिया है. क्योकि ट्रम्प जिस तरह से देशो पर टैरिफ लगा रहे है वो सामान्य नहीं जान पड़ते

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प रूस-युक्रेन युद्ध रुकवाने में असमर्थ हो रहे है.और यही बात उन्हें हजम नहीं हो रही.इसकी कारण रूस से तेल खरीदने वाले देशो पर अपना टैरिफ चाबुक चला रहे है.वे अपने बयानों में कहते है जो देश रूस से तेल खरीदते है वो रूस को युद्ध के लिए फंडिंग कर रहे है.लेकिन ये बात भी समझनी चाहिए है रूस से जो देश व्यापार कर रहे है वो रूस-युक्रेन तनाव से पहले से चलता आ रहा है.ये तो एक सामान्य बात है ही की रूस जिनसे व्यापार करेंगा वो इस वक़्त उन्हें अपना सामान कम दाम में भी देना चाहेंगा.और जो देश रूस से आयात कर रहे है वो अपनी जरूरतों को पूरा कर रहे है.कोई भी देश अतिरिक्त इम्पोर्ट क्यों करेंगा.
Bharat par 500 % tarrif
भारत और रूस के रिश्ते बहुत मजबूत है. हमारा देश भारत कभी भी किसी युद्ध का समर्थन नहीं करता और दो देशो के आपसी टकराव का फायदा लेना भी उचित नहीं मानता.वर्षो से भारत रूस से तेल और उर्जा आयात करता आया है.और डोनाल्ट ट्रम्प इसी मुद्दे को लेकर भारत से अमेरिका में आयात होनेवाली वस्तुओ पर अन्य देशो से ज्यादा tarrif लगा रहे है.
जनवरी 2026 के प्रारंभ में अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस से तेल खरीदने वाले देश पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले रूस प्रतिबंध बिल 2025 का समर्थन किया है.जिसे भारत पर भी इसका असर पड़नेवाला है. भारत सरकार भी इस पर नजर रख रही है.इसके आलावा चीन और ब्राजील पर भी इस बिल का असर पड़नेवाला है क्योकि ये देश भी रूस से कच्चा तेल खरीदते है.अब तक भारत पर 50 प्रतिशत tarrif लगया गया है लेकिन इस बिल के पास होने पर ये 500% तक हो सकता है.
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