
POS SALE का मतलब है प्वाइंट ऑफ सेल | (POINT OF SALE ) प्वाइंट शब्द विक्रेता की लोकेशन को सम्बोधित करता है |
समान्य भाषा में कहें तो प्वाइंट ऑफ सेल वो सेल है जो ऑन स्पॉट की जाती है | ग्राहक जब काउंटर पर (फिजिकल स्टोर) या ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई सर्विस या प्रोडक्ट खरीदता है, तो उस समय जो लेन-देन होता है, वही POS सिस्टम द्वारा रिकॉर्ड किया जाता है।।उदहारण के लिए DMART से खरीदारी करके चेकआउट करते समय बिलिंग काउंटर पर जनरेट किया जानेवाला बिल POS Invoice कहा जाता है इसी तरह रिटेल स्टोर्स, ग्रॉसरी, रिटेल क्लॉथ शॉप, रिटेल मेडिकल स्टोर POS इनवॉइस जेनरेट करते है | इसी तरह E-कॉमर्स वेबसाइट से खरीदी करने पर बनने वाले बिल को POS कहा जाता है.
Point of sale system software copitablility
POS (Point of Sale) सिस्टम के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों जरूरी होते हैं। POS सिस्टम में ऐसा सपोर्टेबल अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर होना चाहिए, जिससे इनवॉइस बनाना आसान हो और सभी प्रकार के भुगतान के माध्यमों (Payment Modes) का विकल्प उपलब्ध हो। आज के समय में ग्राहक UPI, कार्ड स्वाइप, और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए भुगतान करते हैं। विक्रेता को सभी लेन-देन का रिकॉर्ड सही तरीके से बनाए रखने के लिए सॉफ्टवेयर में सभी प्रकार के भुगतान के प्रकार (Payment Types) मौजूद होना जरूरी है।
“POS सिस्टम के मुख्य घटक | Components of POS System
POS सिस्टम के हार्डवेयर कॉम्पोनेन्ट : POS System में सॉफ्टवेर के साथ हार्डवेयर उपकरणों का भी उपयोग किजा जाता है | जैसे POS रसीद या बिल प्रिंट करने के लिए सपोर्टेबल प्रिंटर का उपयोग किया जाता है | यहाँ कुश हार्डवेयर उपकरणों की जानकारी दी गयी है जिनका POS सिस्टम में उपयोग किया जाता है
स्कैनर मशीन : बिल बनाने में समय बचाने और तुरंत बिल तैयार करने के लिए आमतौर पर स्कैनर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। स्कैनर मशीन से आइटम पर लगे बारकोड को स्कैन किया जाता है। इससे आइटम बिल में सीधे मूल्य के साथ सेलेक्ट हो जाता है और बिल बनाने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
कार्ड रीडर मशीन : POS इनवॉइस के भुगतान के लिए कार्ड रीडर या कार्ड स्वाइप मशीन की आवश्यकता होती है। जब ग्राहक कार्ड स्वाइप करता है, तो उसका बैलेंस (Balance) ग्राहक के बैंक अकाउंट से डेबिट हो जाता है और विक्रेता के अकाउंट में क्रेडिट हो जाता है। इस प्रक्रिया से ऑन-स्पॉट भुगतान सफलतापूर्वक हो जाता है और लेन-देन तुरंत स्पष्ट हो जाता है। इस प्रकार के ट्रांजेक्शन सुरक्षित होते है क्योकि पेमेंट प्रक्रिया कस्टमर के पिन दर्ज करने के बाद सफल होती है.
प्रिंटर : Point of Sale इनवॉइस प्रिंट करने के लिए प्रिंटर का होना आवश्यक है |
Statationary : POS सिस्टम में प्रतिदिन बिल और रसीद प्रिंट करने और बार कोड लेबल बनाने के लिए अलग-अलग प्रकार के पेपर का इस्तेमाल किया जाता है
कंप्यूटर या अन्य साधन :POS सिस्टम को चलाने के लिए कंप्यूटर, टैबलेट या POS टर्मिनल का उपयोग किया जाता है। इसी पर सॉफ्टवेयर चलता है जिससे POS Invoice तैयार किया जाता है। POS इनवॉइस को मैन्युअली बनाना आसान नहीं होता क्योकि मैन्युअली बनाने में समय ज्यादा लगता है रिटेल स्टोर्स में ग्राहक को इनवॉइस तैयार होने के बाद ही आइटम दिए जाते है ऐसे में कंप्यूटर या अन्य उपकरण के माध्यम से इनवॉइस बनाये जाते है इससे इनवॉइस डिजिटल माध्यम में सेव हो जाते है |
CASH DRAWAR : POS सिस्टम में सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट ही नहीं, नकद लेन-देन (Cash Transaction) भी रोज़मर्रा का हिस्सा है।नकद को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए Cash Drawer का उपयोग किया जाता है।
कैश रजिस्टर : रिटेल स्टोर में कैश रजिस्टर भी मेंटेन किया जाता है। प्राप्त होने वाले कैश ट्रांज़ैक्शन को कैश रजिस्टर में लिखा जाता है।
POS Transaction क्या है? POS लेन-देन उपभोक्ता बाजार को कैसे आकर्षित करता है ?
सामान्यतः POS ट्रांजेक्शन ग्राहक के साथ Direct व्यवहार करते समय किए जाते हैं। जैसे कपड़ों की दुकानों, फूड आउटलेट्स, एंटरटेनमेंट सेंटर, और ग्रोसरी स्टोर्स में विक्रेता (Vendor) और खरीदार (Buyer) के बीच सीधा लेन-देन होता है। इस प्रकार के लेन-देन को POS Transaction कहा जाता है।
POS ट्रांजेक्शन को डे-टू-डे ट्रांजेक्शन भी कहा जा सकता है, क्योंकि ये रोज़मर्रा की खरीद-बिक्री से जुड़े होते हैं। इन ट्रांजेक्शनों के माध्यम से बाजार में फंड का प्रवाह (Fund Flow) बना रहता है। विशेष रूप से त्योहारों के मौसम (Festival Season) में POS ट्रांजेक्शन काफी बढ़ जाते हैं और यह बाजार की गतिविधियों को बढ़ाने में बूस्टर का काम करते हैं। हैं। POS ट्रांजेक्शन केवल ऑफलाइन ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन भी बड़े पैमाने पर किए जाते हैं। आज के समय में त्योहारों के मौसम में ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान भी POS ट्रांजेक्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ग्राहक विभिन्न ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से ऑर्डर करते हैं इस प्रकार ऑनलाइन POS सिस्टम के माध्यम से खरीद–बिक्री की प्रक्रिया तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाती है, जिससे ग्राहक और विक्रेता दोनों को लाभ मिलता है।। इसके बाद विक्रेता की ओर से तुरंत POS इनवॉइस तैयार हो जाता है और भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
Point-of-Sale (POS) System के प्रमुख Benefit
POS सिस्टम से व्यवहार आसान और तुरंत हो जाते है | POS सिस्टम के कई फायदे है जिनके बारे में इस पॉट्स में बताया गया है | पीओएस सिस्टम के फायदे :
सुरक्षित और पारदर्शी : POS सिस्टम व्यवसाय की प्रक्रियाओं को तेज़, सुरक्षित और पारदर्शी बनाता है। विक्रेता को अपने स्टॉक और बिक्री का सही रिकॉर्ड तुरंत मिलता है, और ग्राहक को तुरंत उत्पाद या सेवा का लाभ प्राप्त होता है। इसके अलावा, POS सिस्टम बिक्री को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सुगम बनाता है, जिससे ग्राहक संतुष्टि और व्यापार की दक्षता दोनों बढ़ती हैं।
कोई मध्यस्थ नहीं ( No (Intermediaries) : POS बिक्री में सामान और सेवाएँ सीधे अंतिम ग्राहक तक पहुँचती हैं, जिससे सप्लाई चैन में मौजूद अनावश्यक मध्यस्थों (Intermediaries) की आवश्यकता कम हो जाती है।
कोई बकाया बोझ नहीं : POS (Point of Sale) सिस्टम में विक्रेता और ग्राहक का लेन-देन तुरंत स्पष्ट हो जाता है। इस प्रणाली के माध्यम से विक्रेता को भारी बकाया राशि (Outstanding Payments) या लंबित भुगतानों का सामना नहीं करना पड़ता।
अलग-अलग खातों की आवश्यकता समाप्त : इस प्रणाली में विक्रेता को ग्राहकों का अलग-अलग खाता (Account) रखने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि सभी लेन-देन और रिकॉर्ड अपने आप सिस्टम में दर्ज हो जाते हैं। इससे अकाउंटिंग का बोझ कम हो जाता है |
रिपोर्ट्स और स्टॉक की आसान जाँच : POS बिलिंग सिस्टम में सेल,परचेस और अन्य रिपोर्ट्स को आसानी से जाँच कर सकते है | किसी आइटम की सेल सबसे अधिक हो रही है ,किसी आइटम का वर्तमान में कितना स्टॉक उपलब्ध है सभी रिपोर्ट्स POS एकाउंटिंग सॉफ्टवेअर में आसानी से मिल जाती है | इससे पुराने और expired स्टॉक भी देख सकते है.
स्टॉक प्रबंधन (Inventory Management ) : POS (Point of Sale) सिस्टम से स्टॉक की real-time report तैयार हो जाती है। जब भी STORE में कोई Product POS से sale होता है, तो सिस्टम तुरंत उस product का stock automatically कम कर देता है। इससे उसी समय पता चल जाता है कि कितनी quantity बची है। POS (Point of Sale) सिस्टम की मदद से vendor या दुकानदार inventory को balance रख सकता है। इससे stock ज्यादा (overstock) या कम (stock-out) होने की स्थिति कम हो जाती है |
How to create stock item,stock groups and units of measures in tally
विशेष ऑफर : POS सिस्टम में विशेष ऑफर विक्रेता और खरीदार दोनों के लिए लाभदायक होता है। विशेष ऑफर के कारण ग्राहक आकर्षित होकर खरीदारी करते हैं, जिससे विक्रेता की बिक्री में वृद्धि होती है।
बेहतर ग्राहक सेवा : POS Billing सिस्टम की मदद से ग्राहकों को तेज़ सुविधाजनक सेवा मिलती है। बिलिंग और भुगतान प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाती है, जिससे ग्राहकों को अधिक समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता । कुछ क्षेत्र जैसे पेट्रोल पंप और अस्पताल बड़े शहरों में चौबीसों घंटे ग्राहकों की सेवा में उपलब्ध रहते हैं। ऐसे क्षेत्रों में POS सिस्टम के माध्यम से तुरंत इनवॉइस बनाकर ग्राहक से अल्प समय में लेन-देन किया जा सकता है। इससे बिलिंग प्रक्रिया तेज़ और आसान हो जाती है तथा ग्राहकों को बेहतर और त्वरित सेवा मिलती है।
POS सिस्टम के नुकसान (Disadvantages of POS System)
महँगा सेटअप : POS सिस्टम से तुरंत बिल बनता है और payment उसी समय लिया जाता है, लेकिन छोटे व्यवसायों के लिए इसकी लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है। POS सिस्टम छोटे दुकानदारों के लिए महंगा हो सकता है क्योंकि इसके लिए कई चीज़ों की आवश्यक होता है इसके लिए कंप्यूटर सिस्टम, सॉफ़्टवेयर, बारकोड, स्कैनर मशीन, कार्ड रीडर मशीन इन सबका setup होना आवश्यक है। जो एक छोटे seller के लिए महंगा हो सकता है।
सॉफ्टवेयर पर निर्भरता : नए-नए retail और e-commerce startups अपने accounting और billing software के लिए POS compatible software का उपयोग करते हैं।ऐसे में, उन्हें अक्सर software की संरचना और POS के साथ तैयार होने वाली reports को समझने में कठिनाई होती है।इस समस्या को हल करने के लिए, वे software support executive से chat या call के माध्यम से चर्चा कर सकते हैं। software support executive समय पर उपलब्ध ना होने पर जब उनसे संपर्क नहीं हो पाता, तो काम में देरी हो सकती है। POS के लिए मार्केट में कई नए-नए software उपलब्ध हैं, जिनके features और functionality समझना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
Friequenlty Asked Questions :
POINT OF SALE ( पॉइंट ऑफ सेल )
POS वह जगह जहाँ से ग्राहक कोई वास्तु खरीदता है POS ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से की जाती है ऑफलाइन ग्राहक स्टोर पर विजिट करके खरीदी करते है और ऑनलाइन वेबसाइट या एप्लीकेशन से खरीदी की जताई है |
POS बिल की का भुगतना नगद देकर या किसी भी ऑनलाइन माध्यम से की जाती है ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए यूजर UPI एप्प, डेबिट या क्रेडिट कार्ड,वॉलेट या ऑनलाइन बैंकिंग से किया जाता है | UPI से विक्रेता का QR Scan करके भुगतान कर सकते हैं और कार्ड के लिए मशीन में कार्ड Insert किया जाता है जिससे स्क्रीन पर Amount Display होता है और Customer के PIN दर्ज करने पर भुगतान हो जाता है।
रिटेल स्टोर्स,शॉपिंग माल,ग्रोसरी शॉप,फ़ूड स्टोर्स,पेट्रोल पंप ,मनोरंजन सेक्टर जैसे सिनेमा, मेडिकल और हॉस्पिटल क्षेत्र,ई कॉमर्स बिज़नेस,इत्यादि।
उमीद है पॉइंट ऑफ सेल Point of sale क्या है ? पीओएस क्या है इसके फायदे और नुकसान क्या है ? POS व्यवहार किस प्रकार अर्थव्यवस्था में बूस्टर साबित होते है ? इन सब के बारे में प्राप्त जानकारी आपके लिए फायदेमंद रही होंगी
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