एकाउंटिंग केवल बड़ी बड़ी कंपनियों के कार्य का हिस्सा नहीं बल्कि हर व्यक्ति की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा है है। जेब खर्च,घर का खर्च,बजट या अपने भविष्य की योजना बनाने में एकाउंटिंग की अहम भूमिका होती है.कॉमर्स के विद्यार्थियों को इन बातो की अच्छी समझ होती हो.लेकिन आज के समय में लेखांकन का स्वरुप बदलता जा रहा है सरकार की डिजिटल प्रणाली और नए कर ढाचे से अकाउंटेंट और कंपनियों को इसे परिभाषित करना और इसके नए स्वरुप को लेकर चलना थोड़ा मुश्किल लगता है.इस पोस्ट में हम इसी दुविधा को समझेंगे.इस पोस्ट में में कुश Accounting Tips के बारे में जानेंगे
Accounting Tips For Beginner
अकाउंट को सामान्यतः वित्तीय रूप से ही देखा जाता है लेकिन मेरी राय में एकाउंटिंग ( लेखांकन ) एक कला है एक आर्ट है.लेखांकन के नियमो के अनुसार और सॉफ्टवेर ही अच्छी जानकारी के साथ कार्य करने से एकाउंटिंग जैसा काम भी एक आर्ट बन जाता है. मान लीजिये की आप किसी बैंक स्टेटमेंट को टैली में एंट्री कर रहे है.तो आपको प्रमुख तीन वाउचर्स का तो प्रयोग करना ही होंगा Receipt Voucher , Payment voucher और Contra voucher इसके लिए आपको लेखांकन से सिद्धांतो के बारे में जानकरी होना आवश्यक है.वाउचर एंट्री करने पर हमे वाउचर में एडवांस फीचर्स का उपयोग करना चाहिए जिसमे काम में रूचि बनी रही जैसे रिसीप्ट और पेमेंट एंट्री में बैंक विवरण दर्ज करना चेक नंबर या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन रिफरेन्स के साथ,सही मोड़ ऑफ़ पेमेंट जैसे Cheque,E-fund transfer,UPI या other इस तरह की एंट्रीज़ में कुश नया सा लगता है इसी तरह प्राप्त रकम या भुगतान के एंट्री में Bill wise details भी दर्ज करना कार्य को और भी अपडेट बनाता है. इस तरह के फीचर्स का उपयोग करना कठिन नहीं होता है एक बार सीखने पर हर बार तरह काम करना होता है.इस तरह से एंट्रीज़ करने पर सॉफ्टवेर का सही उपयोग करके रिपोर्ट भी तैयार और व्यू की जा सकती है जैसे बैंक एलोकेशन में चेक डिटेल दर्ज करने पर चेक सर्च का उपयोग करना और पेमेंट में बिल वाइज एंट्री करने पर पेमेंट एडवाइस प्रिंट करना.
Accounting advice and Tips for Account अकाउंटेंट के लिए सुझाव
वाउचर एंट्रीज़ के लिए हम सॉफ्टवेअर के सभी फीचर्स का उपयोग कर सकते है.इसी तरह हमे एकाउंटिंग की सही ज्ञान और Basic Accounting Tips पता हो हो तो इस कार्य को मनोरंजन मान कर सकते है.इसके लिए हमारा बेसिक परफेक्ट होना चाहिए जिससे कोई चाटर्ड अकाउंटेंट या फर्म ओनर भी सवाल करे तो स्पष्टीकरण के साथ सही उत्तर दे सके. जैसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष खर्चो का वर्गीकरण, आय क स्त्रोतों का वर्गीकरण,सम्पति और दायित्वों का विश्लेषण. इस प्रकार के लेखांकन से व्यक्ति या संस्था अपनी आर्थिक स्थिति को स्पष्ट रूप से समझ सकती है.और इसे प्रबंधक भविष्य की योजनाए तैयार कर सकते है
एक अनुभवी अकाउंटेंट केवल डाटा एंट्री तक ही सिमित नहीं रहता है वो सॉफ्टवेर की सुविधा और अकाउंट के सिद्धांतो का सही इस्तेमाल करके अकाउंटेंट कंपनी की वित्तीय प्रणाली को डिजिटल रूप में स्टोर करता है और उससे वित्तीय रिपोर्ट तैयार करके मैनेजमेंट को कंपनी के वित्तीय कार्यो में सहायता करता है.पहले के समय में एकाउंटिंग को बही खाते पर किया जाता है जिसमे बहुत समय लगता है और उसपर सिमित लोग ही काम कर सकते है. लेकिन वक्त बदल चूका है लेखांकन के लिए बहुत सॉफ्टवेर है रिटेल,होलसेल,मैन्युफैक्चरिंग सभी की सुविधानुसार सॉफ्टवेअर उपलब्ध है इसलिए अकाउंटेंट को सॉफ्टवेर की जानकारी होना जरुरी है. एकाउंटिंग इस बात का को ध्यान में रखकर करना चाहिए कि ऑडिट के बाद किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता.ऑडिट हो जाने के बाद डेटा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता इसलिए ऑडिट से पहले सभी खातो को चेक करना चाहिए.
अकाउंट ( लेखांकन ) के नियमो में होनेवाले बदलावों के बारे में अपडेट रहना जरुरी है जैसे सरकार द्वारा किसी नियम,टैक्स,सब्सिडी में बदलाव होने पर एकाउंटिंग भी उसी के अनुरूप होना चाहिए.इसके लिए सॉफ्टवेर भी वे उपयोग करना चाहिए जो समय समय पर हो रहे बदलाव के अनुरूप हो.
Basic Accounting Tips in Hindi
यहाँ पर कुश सामान्य accounting tips दी गयी है जिससे अकाउंट कार्य को आसानी से किया जा सकता है
- Acconting entries करते समय व्यवहार के स्वरुप को समझे.उदाहरण के लिए एक बैंक से दुसरे बैंक में बैलेंस ट्रान्सफर एंट्री contra वाउचर से की जाती है.
- नए खाते बनाते से समय उचित ग्रुप का चयन करते है और लेजर के अनुसार पूर्ण जानकारी अपडेट करे जिसने हम व्यवहार कर रहे है वो जीएसटी पंजीकृत है या नहीं यदि जीएसटी पंजीकृत हो जीएसटी डिटेल दर्ज करे.
- सेल इनवॉइस बनाते समय चेक करे की बिल Ewaybill के दायरे में है या नहीं. यदि Ewaybill की आवशयकता हो टैक्स इनवॉइस के साथ EWAYBILL तैयार करके भेजे.
- समय समय पर सभी खाते और लेनदेन की जाँच करते है
- आवशयक हो तो इंटरनल ऑडिट करे.
- वित्तियर वर्ष के सभी लेनदार के खाते टैली करे
- सभी बैंक लेजर बैंक स्टेटमेंट के साथ समय समय कर टैली करे हो सके तो दो या तीन दिन में एक बार जरुर करे.संभव हो तो हर अगले दिन ही बैंक रेकोनसिल ( Bank Reconcile ) करे.
- सभी खर्चे खाते समय समय जाँच करे.इससे सामान्य त्रुटिया भी सुधर जाती है.
- डाटा सुरक्षा के लिए पासवर्ड सेट करे और प्रतिदिन बैकअप लेना चाहिए.
इस पोस्ट में हमने लेखांकन की बेसिक जानकारी और Basic accounting Tips के बारे में जाना. उमीद करते है इस पोस्ट में दी गयी जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण हो.पोस्ट में जुड़े किसी भी प्रकार के सवाल या सुझाव के लिए कमेंट कर सकते है
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